चिंता कभी-कभी स्वाभाविक है। लेकिन डर या चिंता को नियंत्रित करना कठिन हो, शरीर में बार-बार खतरे जैसी प्रतिक्रिया हो, या काम और रिश्ते प्रभावित हों तो मदद लें।
डॉ. एच. एन. रॉय लेन, हाजीपुर
आम अनुभव
लगातार चिंता, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों में तनाव, ठीक से नींद न आना, ध्यान लगाने की दिक्कत, तेज धड़कन, पसीना, काँपना, मतली या अचानक तीव्र घबराहट जैसा अनुभव चिंता से जुड़ा हो सकता है। कुछ शारीरिक बीमारियाँ भी ऐसे लक्षण दे सकती हैं, इसलिए खुद बीमारी तय न करें।
डॉक्टर को बताएं कि परेशानी का दौर कब शुरू होता है, कितनी देर रहता है, कैफीन या नशीले पदार्थों का उपयोग कितना है और आप किन जगहों या कामों से बचने लगे हैं।
अभी क्या मदद कर सकता है
धीमी साँस, नियमित भोजन, पर्याप्त नींद, कैफीन और निकोटीन कम करना तथा भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना उपयोगी हो सकता है। ये उपाय जाँच का विकल्प नहीं हैं जब परेशानी लगातार या गंभीर हो।
वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित मनोवैज्ञानिक उपचार और जरूरत के अनुसार दवा प्रभावी हो सकते हैं। दवा किसी दूसरे के दवा के पर्चे देखकर शुरू न करें।
मुलाकात की तैयारी
अपनी परेशानी बढ़ाने वाली स्थितियों, शारीरिक लक्षणों और पिछले इलाज को नोट करें।