नशे की लत चरित्र की कमी नहीं है। जाँच में यह समझा जाता है कि कौन-सा नशा, कितनी मात्रा में और कितनी बार लिया जाता है। आखिरी बार सेवन, नशा छोड़ने पर होने वाली परेशानी, और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी भी ज़रूरी है।
डॉ. एच. एन. रॉय लेन, हाजीपुर
कब परामर्श लें
नशा कम करने की असफल कोशिश, नशे की तीव्र इच्छा, काम या परिवार पर असर, जोखिम भरा सेवन, पहले जैसा असर पाने के लिए मात्रा बढ़ना, या न लेने पर शरीर खराब होना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। मरीज कौन-सा नशीला पदार्थ कितनी मात्रा में और कब लेता है, यह ईमानदारी से बताना सुरक्षित देखभाल के लिए जरूरी है।
परिवार खर्च छिपाने, हिंसा, वाहन चलाने, दवा या नशे की अत्यधिक मात्रा या दवाओं के साथ मिलाकर लेने जैसी बातों को शांत और तथ्यपरक तरीके से बताए।
अचानक बंद करना हमेशा सुरक्षित नहीं
लंबे समय से बहुत अधिक शराब या नींद या शांत करने वाली कुछ दवाएँ लेने वाले व्यक्ति में अचानक रोकने पर गंभीर शारीरिक परेशानी हो सकती है। काँपना, बहुत पसीना, उलझन, ऐसी चीज़ें दिखना या आवाज़ें सुनाई देना जो वास्तव में नहीं हैं, दौरा, बेहोशी या तेज बिगड़ाव हो तो इसे आपातकालीन स्थिति मानें।
नशा छुड़ाने की शुरुआती चिकित्सा और आगे के इलाज की योजना व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार डॉक्टर तय करता है। घर पर अनजान दवा देकर नशा छुड़ाने की चिकित्सा न कराएं।
परिवार के लिए
व्यक्ति को अपमानित करने के बजाय सुरक्षा, इलाज और स्पष्ट सीमाओं पर ध्यान दें।